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Essay on Delhi Darshan in Hindi

4 days ago

दिल्ली के ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल की यात्रा पर निबंध ( Essay on Delhi Darshan/ Sightseeing Trip in Hindi

दिल्ली भारतवर्ष की राजधानी है। दिल्ली अति प्राचीन काल से ही भारत की राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित रही है। महाभारत काल में यह इंद्रप्रस्थ के नाम से जानी जाती थी। पर्यटन की दृष्टि से भी दिल्ली अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ की अनेक ऐतिहासिक व धार्मिक इमारतें पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखती हैं दिल्ली शहर हिंदू, मुस्लिम और अंग्रेजी शासकों की स्मृतियो से भरा हुआ है। इसके अतिरिक्त आधुनिक दर्शनीय स्थलों ने तो इसकी सुंदरता को और भी चार चाँद लगा दिए है। इन सब दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए देश-विदेश से हर वर्ष लाखों की संख्या में सैलानी दिल्ली दर्शन के लिए आते हैं।

दिल्ली दो भागों में विभाजित हैं। दिल्ली व नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली के प्रमुख दर्शनीय स्थल है। लाल किला, दिल्ली रेलवे का बड़ा जंक्शन, जामा मस्जिद, गुरुद्वारा सीस गंज, चांदनी चौक का भव्य बाजार, पुराना किला आदि। इनमें लाल किला पत्थर से बना हुआ विशाल किला है जिसे मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया था। अंग्रेजी शासन काल में यह किला सबसे अधिक महत्व रखता था तथा आज भी यह उतना ही महत्वपूर्ण है ।

हर वर्ष 15 अगस्त को इसी ऐतिहासिक लाल किला किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं तथा राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं । लाल किले के अंदर दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम आदि अनेक ऐतिहासिक महत्व के दर्शनीय स्मारक हैं।

इसके अलावा लाल किला परिसर के अंदर सात मौजूदा संग्रहालय हैं:-

1.   पुरातत्व संग्रहालय,

2.   भारतीय युद्ध स्मारक संग्रहालय,

3.   सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय,

4.   याद-ए-जलियन,

5.   1857 का संग्रहालय,

6.   द्रश्यकला, और

7.   आज़ादी के दीवाने

लाल किले के सामने:-

लाल किले के सामने जामा मस्जिद मुसलमानो का पूजा-स्थल है, जिसे मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया था। लाल किला से थोड़ी दूर फव्वारे के ठीक सामने गुरुद्वारा सीसगंज है। जहां गुरु तेग बहादुरने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपनी बलि दी थी। यह सिखों का पवित्र स्थान है, जहां सभी धर्मों के लोग जा सकते हैं। लाल किले के ठीक सामने चाँदनी चौक का भव्य बाजार है, जो व्यापार का केंद्र भी है। इन सबके पास दिल्ली रेल्वे स्टेशन है।

इंडिया गेट:-

इंडिया गेट का निर्माण ब्रिटिश-भारतीय सेना के 70,000 सैनिकों की स्मृति में किया गया था।  जो सैनिक 1914 और 1921 के बीच प्रथम विश्व युद्ध में फ्रांस, फ्लैंडर्स, मेसोपोटामिया, फारस, पूर्वी अफ्रीका, गैलीपोली और निकट और सुदूर पूर्व में मारे गए थे। और तीसरा एंग्लो-अफगान युद्ध। यूनाइटेड किंगडम के कुछ सैनिकों और अधिकारियों सहित 13,300 सैनिकों के नाम गेट पर अंकित हैं।

दिल्ली के ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल की यात्रा पर निबंध ( Essay on Delhi Darshan/ Sightseeing Trip in Hindi )

वॉर मेमोरियल स्मारक:-

इंडिया गेट के पास वॉर मेमोरियल स्मारक उन लोगों के स्मरण के लिए बनाया गया है जिनकी मृत्यु युद्ध में हुई थी। यह आगंतुकों को इस जगाह के साथ एक सचेत जुड़ाव विकसित करने का अवसर प्रदान करता है, उन लोगों के साथ जिनकी स्मृति में यह वॉर मेमोरियल निर्मित है। स्मारक एक गहरे और गतिशील अनुभव का प्रयास करता है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। आजादी के बाद से, भारतीय सशस्त्र बलों के 25,000 से अधिक सैनिकों ने देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक इस प्रकार हमारे सशस्त्र बलों के लिए हमारे देश की कृतज्ञता का प्रतिनिधित्व करता है। स्मारक हमारे नागरिकों में उच्च नैतिक मूल्यों, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव की भावना को मजबूत करने में मदद करेगा। यह स्वतंत्रता के बाद से विभिन्न संघर्षों, संयुक्त राष्ट्र संचालन, मानवीय सहायता और आपदा प्रतिक्रिया संचालन के दौरान हमारे सैनिकों द्वारा किए गए बलिदानों की गवाही देगा। यह हमारे सशस्त्र बलों की समृद्ध सैन्य परंपराओं को राष्ट्र के लिए निस्वार्थ सेवा के एक चमकदार उदाहरण के रूप में प्रदर्शित करेगा।

जनपथ मार्केट:-

दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध बाजारों में से एक जनपथ मार्केट है। जहाँ भारतीय और विदेशी दोनों प्रकार के पर्यटक अक्सर आते हैं। बाजार अनिवार्य उत्पादों को बेचने वाले बुटीक स्टोर की एक लंबी लाइन है, जो उत्पाद बड़े बड़े मॉल और बड़े स्टोर में भी ढूंढना मुश्किल होते हैं। वे अक्सर यहाँ उपलब्ध होते हैं।आप यहां अपनी पसंद के स्मृति चिन्ह, जंक ज्वेलरी, होम डेकोर, फुटवियर और अप्पर्स खरीद सकते हैं। पर्यटक दिल्ली दर्शन बस यात्रा के दौरान भी यहां जाना चाहते हैं।

गुजराती बाजार और तिब्बती बाजार दो प्रमुख सड़कें हैं। दोनों मिलकर पूरे जनपथ मार्केट का प्रतिनिधित्व करती हैं। कश्मीरी सामान जैसे ऊनी स्कार्फ, पश्मीना शॉल, सूट, हाथ से बनी कुर्तियां, पीतल की कलाकृतियां, चीनी लैंप, लकड़ी की स्टेशनरी आइटम, इस तरह के यहां और भी बहुत प्रमुख आकर्षण हैं।

इसके अतिरिक्त:-

इसके अतिरिक्त, कुतुबमीनार,  हुमायूँ का मकबरा, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट, नेहरू तारामंडल राजघाट, शांतिवन, विजयघाट, शक्तिस्थल,  चिड़ियाघर, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस, अक्षरधाम मंदिर आदि। इनमे राजघाट महात्मा गाँधी जी की, शांतिवन श्री नेहरू जी की, विजय घाट लाल बहादुर शास्त्री जी की व शक्तिस्थल श्रीमती इंदिरा गांधी जी की समाधिया है। चिड़ियाघर में अनेकों पशु-पक्षी है। जिन्हें बच्चें बहुत चाव से देखते है। संसद भवन में देश के कानून बनाये जाते हैं। राष्ट्रपति भवन में देश के राष्ट्रपति रहते है। पुराने किले के संदर्भ में लोगों का मानना है कि यह किला महाभारत काल में पांडवों द्‌वारा बनवाया गया था। इंडिया गेट पर प्रज्वलित रहने वाली जय जवान ज्योति स्वतंत्रता संघर्ष का स्मरण करा देती है। यमुना नदी की चर्चा और दर्शन किये बिना दिल्ली दर्शन को सम्पुर्ण माना ही नही जा सकता ।

मंदिर:-

लक्ष्मीनारायण मंदिर एक हिंदू मंदिर है, जिसे बिड़ला मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित है। छतरपुर मंदिर,  छतरपुर, दिल्ली के दक्षिण में गुरुग्राम सीमा के पास स्थित है। यह मंदिर देवी, कात्यायनी को समर्पित है।नेहरू प्लेस स्थित ‘लोटस टेंपल’ की बनावट देखते हो बनती है। कमल की आकृति में बना हुआ यह मंदिर बहाई धर्म से संबंध रखता है जहाँ सभी धर्मों के लोग जाकर प्रार्थना कर सकते हैं। यहाँ प्रार्थना करने का एक अलग तरीका है। आगंतुक मौन होकर संपूर्ण जीव जगत् एव संपूर्ण ब्रह्‌माड में स्थित निराकार ईश्वर के प्रति प्रेम का प्रदर्शन करते हैं।

इस प्रकार दिल्ली ऐतिहासिक स्थलों का जमघट है। जिसमे तरह-तरह के ऐतिहासिक स्थल ओर मंदिर इत्यादि है। जो अपनी वस्तुकला ओर बनाबट के कारण विशव विख्यात है। जिसकी सुंदरता व बनावट के बारे में इन अक्षरों का प्रयोग करके हम अनुभव नही कर सकते। इसका आनन्द तो दिल्ली में जाकर अपनी स्वयं की आखों से साक्षात दिल्ली दर्शन करके ही ले सकते है। Essay on Delhi Darshan/ Sightseeing Trip in Hindi.

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